वैरिकोज वेन्स क्या है और आयुर्वेद की मदद से इसको कैसे ठीक किया जा सकता है ?

Ayurvedic treatment

वैरिकोज वेन्स क्या है और आयुर्वेद की मदद से इसको कैसे ठीक किया जा सकता है ?

  • January 25, 2024

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वैरिकोज वेन्स को वेरिकोसाइटिस भी कहा जाता है। ये समस्‍या तब उत्‍पन्‍न होती है जब नसें बड़ी, चौड़ी या रक्‍त से ज्‍यादा भर जाती है। वैरिकोज वेन्स अक्‍सर सूजी औैर उभरी हुई नसों के रूप में सामने आती है और ये नीले या लाल रंग की दिखती है जिनमें अक्‍सर दर्द महसूस होता है। और ये समस्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है, तो चलिए जानने की कोशिश करते है की आयुर्वेद की मदद से इस समस्या का बचाव हम कैसे कर सकते है ; 

वैरिकोज वेन्स क्या है ?

  • जब नसें ठीक तरह से काम नहीं कर पाती है, तब वैरिकोज वेन्सकी समस्‍या उत्‍पन्‍न होती है। नसों की एक तरफ की वाॉल्‍व रक्‍त प्रवाह को रोक देती है। जब ये वॉल्‍व काम करना बंद कर देती है। तो रक्‍त ह्रदय तक पहुंचने की बजाय नसों में ही इकट्ठा होने लगता है। नसों का आकार बढ़ जाता है। ये समस्‍या अक्‍सर टांगों को प्रभावित करती है।
  • वैरिकोज वेन्स आमतौर पर त्वचा की सतह के नीचे उभरती हुई नीली नसें दिखती है। यह हमेशा पैर और पंजों को प्रभावित करती है। सूजी और मुड़ी हुई नसों को कभी-कभी स्पाइडर वेन्स कहा जाता है।
  • कई लोगों के लिए, वैरिकोज वेन्स और स्पाइडर वेन्स सामान्य समस्या होती है, लेकिन कुछ लोगों को इससे दर्द और असुविधा हो सकती है। कभी-कभी यह गंभीर समस्याओं का रूप भी धारण कर लेती है।

वैरिकोज वेन्स के दौरान दिखने वाले लक्षण किस तरह के है ?

  • गहरी बैंगनी या नीली दिखने वाली नसें।
  • रस्सियों की तरह दिखने वाली मुड़ी और सूजी हुई नसें।
  • पैरों में एक दर्द या भारीपन का महसूस होना।
  • जलन, चीस मचना, मांसपेशियों में ऐंठन और पैरों के निचले हिस्से में सूजन की समस्या।
  • लंबे समय के लिए बैठे या खड़े होने के बाद दर्द का होना।
  • एक या एक से अधिक नसों के आसपास खुजली का होना।
  • टखने के पास त्वचा के अल्सर, जिसका अर्थ है कि आपको नस से सम्बंधित एक गंभीर रोग है जिसे इलाज की आवश्यकता है। 

वैरिकोज वेन्स के लक्षणों को जानने के बाद आपको इसके इलाज के लिए बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

वैरिकोज वेन्स होने के कारण क्या है ?

  • प्रेग्‍नेंसी। 
  • मेनोपॉज (मासिक धर्म का रुकना)।
  • 50 से अधिक उम्र का होना। 
  • लंबे समय तक खड़े रहना। 
  • मोटापे की समस्या।

वैरिकोज वेन्स को कैसे रोका जा सकता है ?

  • लंबे समय तक खड़े रहने से बचें। स्ट्रेचिंग और घूमने-फिरने के लिए बार-बार ब्रेक लें, खासकर यदि आपका पेशा आपको अपने पैरों पर खड़ा होने की मांग करता है।
  • अपने हृदय में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के लिए अपने पैरों को अपनी कमर से ऊपर उठाएं।
  • अपना वजन नियंत्रण में रखें. अतिरिक्त पाउंड कम करने से आपकी रक्त वाहिकाओं के अंदर दबाव कम हो जाता है।
  • धूम्रपान बंद करें। धूम्रपान रक्त धमनियों को नष्ट कर देता है, रक्त प्रवाह को कम कर देता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है।
  • संपीड़न मोज़े आज़माएँ। सहायक कपड़े, जैसे सपोर्ट मोजे और पेंटीहोज, रक्त प्रवाह में सहायता कर सकते है और आपकी नसों को संकुचित कर सकते है, जिससे वैरिकाज़ नसों की प्रगति धीमी हो जाती है।
  • ज्यादा टाइट कपडे पहनने से बचे और ऐसे कपड़े पहनें जो उचित रूप से फिट हो।

वैरिकोज वेन्स को ठीक करने के आयुर्वेदिक उपचार क्या है ?

  • अरंडी के तेल का चयन करना जो व्यक्ति के सूजन को कम करता है और रक्त के थक्कों को ढीला करता है। यह हर्बल उपचार वैरिकाज़ नसों के कारण होने वाले काले धब्बों को खत्म करने के लिए है। कुछ मिनटों के लिए इसे धीरे-धीरे गोलाकार गति में रगड़ें और फिर, इसे त्वचा पर लगाए।
  • आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी “वैरिकोज वेन्स” का इलाज करती है। जिनमे से “मंजिष्ठा”, का नाम सबसे पहले आता है। मंजिष्ठा भारत में उगाई जाने वाली एक जड़ी-बूटी है, जिसमें शक्तिशाली सूजन-रोधी गुण होते है जो पैर की सूजन को कम करने और वैरिकाज़ नसों के लक्षणों को कम करने में सहायता करते है। यह पौधा वात, पित्त और कफ के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है, रक्त की अशुद्धियों को दूर करता है और परिसंचरण को बढ़ाता है। यह वैरिकाज़ नसों के कारण होने वाले दाग और खामियों को त्वचा से साफ़ करता है।
  • “सारिवा की जड़ें वैरिकाज़” नसों में मदद करने के लिए जानी जाती है। इन जड़ों में पौधे के यौगिक पाए जाते है, जो त्वचा की रंगत में सुधार कर सकते है और दर्द को कम कर सकते है। वैरिकाज़ नसों की समस्या के इलाज के लिए निकाली गई जड़ों को दवा या मलहम के रूप में प्रभावित क्षेत्र पर शीर्ष पर लगाया जाता है।
  • “चिरबिलवा जड़ी बूटी” भारतीय एल्म पेड़ से प्राप्त होती है। पेड़ की छाल और पत्तियों का उपयोग करके वैरिकाज़ नसों और अन्य त्रिदोष-संबंधी स्थितियों का इलाज किया जा सकता है। चिलराबिल्वा एक प्राकृतिक रक्त शोधक है जिसे निगला जा सकता है या शीर्ष पर लगाया जा सकता है। यह पौधा नसों और प्रभावित क्षेत्र में संतुलन बहाल करने का काम भी करता है। 
  • “गोटू कोला” एक अन्य लाभकारी जड़ी बूटी, है जिसका चयन करके व्यक्ति वैरिकाज़ के कारण होने वाली समस्याओं से खुद का बचाव आसानी से कर सकते है। गोटू कोला आयरन और अन्य खनिजों से भरपूर है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन का भी समर्थन करता है। गोटू कोला जड़ी बूटी के प्रभाव को बढ़ाने के लिए इसका सेवन जूस या किसी अन्य हर्बल पेय के साथ किया जा सकता है। 

अगर आप वैरिकोज वेन्स का प्राकृतिक उपचार करवाना चाहती है, तो इसके लिए आपको उपरोक्त आयुर्वेदिक उपचारों का चयन करना चाहिए।

ध्यान रखें :

वैरिकोज वेन्स की समस्या होने पर आपको ध्यान रखना है की आप ज्यादा खड़े न हो और जितना हो सकें अपने भार पर भी नियंत्रण रखें। 

सुझाव :

वैरिकोज वेन्स की समस्या में व्यक्ति का शरीर काफी प्रभावित होता है, इसलिए जरूरी है की इस समस्या में उसको अपना खास ध्यान रखना चाहिए और इसके लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। गंभीर नसों की समस्या होने पर आपको संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

सूजी, मोटी या खून से भरी हुई नसें आपको काफी प्रभावित कर सकती है, इसलिए इससे बचाव के लिए आपको इसकी समस्या गंभीर न हो इससे पहले ही डॉक्टर का चयन करें और किसी भी तरह की दवाई या उपचार को अपनी मर्ज़ी से ना लें। 

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जानिए कब्ज को चुटकियों में दूर करने की आयुर्वेदिक औषधियाँ व घरेलु उपचार !

  • September 26, 2023

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कब्ज की समस्या अगर व्यक्ति के पेट में बन जाए तो उसके लिए काफी मुश्किल खड़ी हो जाती है, क्युकी कब्ज के कारण उसका कुछ भी खा पाना काफी मुश्किल हो जाता है। वहीं कई बार कब्ज के कारण उसको समाज में शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ता है। पर कब्ज की समस्या से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, आयुर्वेद और घरेलु उपचार की मदद से इसके बारे में चर्चा करेंगे;

कब्ज की समस्या का व्यक्ति को सामना क्यों करना पड़ता है ?

  • पर्याप्त नींद न लेने के कारण पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता है, जिसके कारण कब्ज की समस्या सामने आती है। अल्प भोजन ग्रहण करना अल्प भोजन ग्रहण करने का अर्थ है जरूरत से कम खाना। शरीर में पानी की कमी का होना। जिसके कारण व्यक्ति कब्ज जैसी समस्या का सामना करता है। 
  • एक साथ पांच से छे खाने की चीजों का सेवन करने के कारण भी व्यक्ति इस तरह की समस्या का सामना कर सकता है।  

कब्ज होने के दौरान व्यक्ति में किस तरह के लक्षण नज़र आते है ?

  • सप्ताह में तीन बार से कम मल का त्याग करना। 
  • सूखा या कठोर मल का आना। 
  • मल त्यागने के लिए जोर का लगना। 
  • ऐसा महसूस होना मानो आपने अपनी आंतें पूरी तरह से खाली नहीं की है। 
  • ऐसा महसूस होना जैसे आपके मलाशय में कोई रुकावट हो। 
  • अपने मलाशय को खाली करने के लिए सहायता की आवश्यकता है – जैसे पेट पर किसी दाब का डालना। 

अगर आपको मल त्यागने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको कब्ज के प्राकृतिक उपचार का चयन करना चाहिए। 

कब्ज होने के क्या कारण है ?

  • पर्याप्त पानी न पीने के कारण कब्ज और कठोर मल जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
  • पर्याप्त मात्रा में फाइबर युक्त भोजन का सेवन करने के कारण भी ये समस्या उत्पन्न होती है।
  • व्यायाम की कमी और गतिहीन जीवनशैली के कारण। 
  • पुरानी दवाओं का अधिक मात्रा में सेवन करने से भी सूजन और कब्ज जैसी पाचन संबंधी जटिलताओं का शिकार व्यक्ति हो सकता है।
  • बार-बार यात्रा करना, अनियमित खान-पान और सोने का तरीका पाचन तंत्र को असंतुलित कर सकता है, जिससे कब्ज का बनाना लाजमी बात है। 
  • लेज़ी बाउल सिंड्रोम नामक एक अंतर्निहित स्थिति के कारण भी कब्ज हो सकता है, जिसमें मल को रोकने के लिए बृहदान्त्र असामान्य रूप से सिकुड़ जाता है।
  • कब्ज उन गर्भवती महिलाओं में एक समस्या हो सकती है, जो अन्यथा पूरी तरह से स्वस्थ है। 
  • चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) और क्रोहन रोग जैसी आंत संबंधी समस्याएं के कारण।
  • पार्किंसंस रोग, मल्टीपल स्केलेरोसिस या स्ट्रोक जैसे न्यूरोलॉजिकल मुद्दे के कारण।
  • पेल्विक मांसपेशियों का कमजोर होना।

कब्ज के इन कारणों से निजात पाने के लिए आपको बेस्ट आयुर्वेदिक डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

कब्ज की समस्या से निजात दिलवाने के लिए कौन-से घरेलु उपचार है मददगार ?

  • कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए आपको त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। बता दे की इसमें आमलकी, हरीतकी और बिभीतकी नामक तीन औषधियाँ शामिल होती है, वहीं यह प्राकृतिक क्लीन्ज़र आपके पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा है। आप पेट ठीक रखने के लिए त्रिफला चूर्ण या त्रिफला टेबलेट्स का सेवन कर सकते है।
  • जैतून का तेल, या जिसे ऑलिव ऑयल, के नाम से भी जाना जाता है, वहीं ये तेल आपके पाचन तंत्र को सुचारु रूप से काम करने में मदद करने और पेट-सम्बन्धी रोगों को ख़त्म करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा जब तक आपके पेट की समस्या ठीक न हो जाए तब तक प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक पूरी चम्मच भरकर जैतून का तेल जरूर पीना है। इससे आपको कब्ज से छुटकारा मिलेगा। यदि आप चाहें तो जैतून के तेल में नींबू का रस मिला कर भी इसका सेवन कर सकते है।
  • इसबगोल भी आपके पेट या उसमे मौजूद कब्ज की समस्या से आपको निजात दिलवाती है। इसबगोल की बात करें तो इसमें पाचन ठीक करने वाले फाइबर्स का एक मुख्य स्त्रोत शामिल है। तो अगर आप पेट की समस्या से निजात पाना चाहते तो इसके लिए आपको हल्के गर्म पानी में इसबगोल को मिलाकर जरूर पीना चाहिए। 
  • अगर आप पेट की समस्या से निजात पाना चाहते है, तो इसके लिए आपको दही का सेवन करना चाहिए, क्युकि दही आपके पेट में बनने वाले बैक्टीरिया का खात्मा करके आपके पेट की रक्षा करते है। 
  • अंजीर भी आपके पेट की समस्या से आपकी रक्षा करते है, इसलिए आपको अंजीर को रात भर पानी में भिगो कर रखना है और सुबह नाश्ता करने के एक घंटे पहले आपको इसका सेवन करना है। ये आपके तमाम पेट से जुडी समस्या से आपकी रक्षा करते है।

कब्ज से निजात दिलवाने के लिए कौन-सी आयुर्वेदिक औषधियाँ है मददगार ?

  • यदि आप पुराने कब्ज से बीमार है और थक चुके है और जीवनशैली में बदलाव करने से भी आपको मदद नहीं मिल रही है, तो आप कब्ज से निजात पाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार की ओर रुख कर सकते है। 
  • आयुर्वेदिक उपचार में हर्बल फॉर्मूलेशन शामिल होते है, जो मल त्याग को प्रेरित करते है और आपके पाचन तंत्र को वापस व्यवस्थित कर देते है। ये उपचार स्वाभाविक रूप से मल त्याग को सुविधाजनक बनाने के लिए समस्या पर ही इलाज करते है। इसके अलावा हम कुछ निम्न औषधियों के बारे में बताएंगे जिसका सेवन करके आप कब्ज की समस्या से निजात पा सकते है, जैसे ;
  • पहली आयुर्वेदिक औषधि है, ‘अभयारिष्ट’ जो आपके कब्ज का जड़ से खात्मा करते है। 
  • ‘गंधर्वहस्तादि क्वाथ’ भी बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है जिसका सेवन करके आप कब्ज की समस्या से निजात पा सकते है। 
  • अगर आपको कब्ज के हल्के भी गंभीर लक्षण नज़र आने लगें तो इससे बचाव के लिए आपको ‘लैक्सिनोल-एच कैप्सूल’ का सेवन करना चाहिए। 

वहीं अगर आप गंभीर कब्ज की समस्या को लेकर काफी परेशान है, तो इससे बचाव के लिए आपको संजीवनी आयुर्वेदशाला क्लिनिक का चयन करना चाहिए, इसके अलावा आप चाहे तो इन दवाइयों को भी इस क्लिनिक से वाजिफ दाम पर भी ले सकते है। 

निष्कर्ष :

कब्ज की समस्या काफी गंभीर है इसको इनकारा नहीं जा सकता है, लेकिन हां हम चाहे तो इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है, पर ध्यान रहें कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए आपको किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।