आखिर क्या हो सकता है शुगर की दवा को बीच में छोड़ने से? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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आखिर क्या हो सकता है शुगर की दवा को बीच में छोड़ने से? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

  • May 25, 2026

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आज के समय में ऐसे कई लोग हैं, जो हाई ब्लड शुगर की समस्या का सामना कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आज के समय लोगों के शरीर में शुगर का लेवल बढ़ना काफी ज्यादा आम हो गया है, मतलब कि लोगों को डायबिटीज की समस्या होना काफी ज्यादा आम सा हो गया है। आम तौर पर, इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें मोटापा और पेट की चर्बी का बढ़ना, गलत खान-पान का सेवन करना, खराब जीवनशैली होना, उम्र में बढ़ोतरी होना, आनुवंशिकता, तनाव और नींद की कमी होना आदि जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। आम तौर पर, अगर इस समस्या पर महत्वपूर्ण रूप से ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या जीवन के लिए घातक भी साबित हो सकती है। डायबिटीज शरीर की हड्डियों को काफी ज्यादा कमजोर बना देती है, जिसके कारण शरीर पर लगे घाव भी काफी देर से बहते हैं। इसलिए, इस तरह की स्थिति से गुजरने से अच्छा है, कि आज इस समस्या का जल्द से जल्द इलाज करवाएं और आगे होने वाली गंभीर समस्या से अपना बचाव करें। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें,कि ऐसा कहा जाता है, कि डायबिटीज की समस्या के दौरान दवाओं का सेवन किया जाता है और इनका एक कोर्स होता है, जिसको पूरा करना होता है, शायद उम्र भर। इसी के चलते समस्या जल्द से जल्द ठीक होती है। पर, जब शुगर यानी कि डायबिटीज की दवा शुरू होती है, तो ऐसे में पीड़ित व्यक्ति को इनका सेवन जिंदगी भर करना होता है। क्योंकि, अगर ऐसा न किया जाये, तो यह समस्या और भी ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की जान को भी काफी खतरा होता है। आमतौर पर, यह एक इस तरह की समस्या होती है, जिसको अगर वक्त रहते कंट्रोल न किया जाये, या फिर इसका इलाज शुरू न किया जाये, तो इसके कारण शरीर के अंग धीरे धीरे खराब होने लग जाते हैं, जो सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी ठीक साबित नहीं होता है। 

आम तौर पर, कुछ मामलों में डायबिटीज की समस्या काफी ज्यादा जानलेवा भी साबित हो सकती है। दरअसल, जो लोग इस तरह की स्थिति में रोजाना दवा का सेवन करते हैं और ऐसे में जब उनकी शुगर थोड़ी सी ठीक होने लगती है, यानी कि शुगर कंट्रोल में आने लगती है, तो ऐसे में वह मरीज दवा का सेवन करना बंद कर देते हैं और बीच में ही दवा लेना छोड़ देते हैं। पर, ऐसे में सवाल यह उठता है, कि क्या शुगर की दवा को बीच में छोड़ना ठीक होता है, क्या होगा अगर शुगर की दवा को बीच में ही लेना बंद कर दिया जाए? क्या शुगर की दवा बीच में छोड़ा जा सकता है? दरअसल, इन्हीं सवालों का जवाब देते हुए डॉक्टर का कहना है, कि शुगर की दवा को बीच में बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहिए। इसके कारण शरीर को कई तरह के गंभीर नुकसानों का सामना करना पड़ सकता है। आम तौर पर, अगर इस समस्या के दौरान दवा को बीच में ही छोड़ दिया जाता है, तो इसके कारण आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक से बढ़ सकता है, जिसके कारण आपकी तबियत पहले से ज्यादा बिगड़ सकती है और स्थिति जानलेवा भी सकती हो सकती है। इसलिए, बिना डॉक्टर कि सलाह के इस दवा को समस्या के बीच में छोड़ना सेहत और आपके दोनों के लिए ठीक नहीं होता है। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

शुगर की दवा को बीच में छोड़ने से क्या हो सकता है? 

आम तौर पर, अगर डायबिटीज की समस्या से पीड़ित व्यक्ति शुगर की दवा को बीच में ही छोड़ देता है, तो यह काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इसके कारण शरीर को कई तरह के नुकसानों का सामना करना पड़ सकता है। जिसमें ब्लड शुगर लेवल अचानक से बढ़ना और तबीयत का हद से ज्यादा बिगड़ जाना शामिल है। इसके अलावा, इसकी वजह से आपको इस दौरान अपने शरीर में कई तरह के लक्षणों का भी अनुभव हो सकता है, जैसे कि हद से ज्यादा प्यास लगना, काफी ज्यादा कमजोरी महसूस होना, थकान होना और बार बार पेशाब आना आदि। इतना ही नहीं, अगर शुगर की दवा को अचानक से बीच में छोड़ दिया जाए, तो इससे ब्लड शुगर और तेजी से बढ़ेगा और इमरजेंसी जैसी स्थिति उत्पन्न होगी। इसके कारण शरीर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। डायबिटीज की दवा को छोड़ने पर लंबे समय के बाद शरीर को होने वाले गंभीर नुकसान निम्नलिखित हो सकते हैं, जैसे 

  1. इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
  2. किडनी खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है।
  3. इससे आंखों की दृष्टि कम हो सकती है। 
  4. इसके कारण हाथ और पैरों में सुन्नपन हो सकता है।

शुगर को किस तरह कंट्रोल में रखा जा सकता है? 

आम तौर पर, शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते है, जैसे 

  1. रोजाना कम से कम 30 मिनट तक पैदल जरूर चलें। 
  2. रोजाना एक संतुलित डाइट का सेवन करें। 
  3. नियमित योगासन और प्राणायाम करना। 
  4. डाइट में शुगर से परहेज करें।
  5. तनाव लेने से बचें। 
  6. नींद पूरी लें।

निष्कर्ष: डायबिटीज की समस्या लोगों में आम है और इसे कंट्रोल में रखना भी उतना ही ज्यादा जरूरी है। डायबिटीज की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए शुगर की दवा का सेवन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शुगर की दवा को बीच में छोड़ना ठीक नहीं होता है, पर हम में से ज्यादातर लोग शुगर कंट्रोल होने पर दवा को बीच में ही छोड़ देते हैं, जो सेहत के लिए काफी ज्यादा घातक साबित हो सकता है। इससे न केवल इमरजेंसी की स्थिति बनती है, बल्कि इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। अगर आपको ऐसे में लगता है, कि आपका शुगर लेवल अब कंट्रोल में आ गया है, तो इस दवा को छोड़ने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेद शाला के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. किन लोगों को शुगर की समस्या अधिक परेशान करती है?

दरअसल, शुगर यानी कि डायबिटीज की समस्या आज लोगों में काफी ज्यादा आम हो गई है। आम तौर पर, यह समस्या विशेष तौर पर खराब जीवनशैली, जेनेटिक्स और शारीरिक गतिविधि की कमी वाले लोगों को हद से ज्यादा परेशान करती है। 

प्रश्न 2. क्या शरीर में शुगर लेवल बढ़ने पर व्यक्ति की जान को भी खतरा हो सकता है?

दरअसल, हाँ अगर किसी व्यक्ति के शरीर में शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ता है, जो यह व्यक्ति के लिए काफी ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है। क्योंकि, लंबे समय तक की बेकाबू शुगर न केवल आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि यह आपकी किडनी और नसों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, अचानक से शुगर लेवल के स्तर में बढ़ोतरी होना यह सीधे तौर पर आपकी जान के लिए खतरा साबित हो सकता है। 

प्रश्न 3. क्या शुगर से पीड़ित व्यक्ति की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं?

हाँ, यह बात बिलकुल सच है, की शुगर की समस्या से पीड़ित लोगों की हड्डियां काफी ज्यादा कमजोर हो सकती हैं, क्योंकि काफी लंबे समय से बड़ी हुई ब्लड शुगर की यह समस्या हड्डियों के घनत्व को काफी ज्यादा कमजोर बना देती है और साथ में उनकी गुणवव्ता को भी बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। जिसके कारण व्यक्ति को हड्डियों में होने वाले फ्रैक्चर का भी खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। 

प्रश्न 4. क्या शुगर के दौरान लगी चोट या घाव उम्र भर ठीक नहीं होता है?

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, शुगर जिसे डायबिटीज भी कहा जाता हैं, इस दौरान यह कहना ठीक नहीं होगा, कि ऐसे में लगी चोट या फिर घाव उम्र भर ठीक नहीं होता है। दरअसल, सही इलाज और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने से शरीर पर लगे घाव पूरी तरीके से भर जाते हैं। हालांकि, इस दौरान यह जरूर कहा जा सकता है, कि हाई ब्लड शुगर और कमजोर इम्युनिटी की वजह से शुगर से पीड़ित मरीजों के घाव भरने की प्रक्रिया सामान्य लोगों की तुलना में काफी ज्यादा धीमी हो जाती है।

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आखिर क्यों दी जाती है हर तीन महीने में डायबिटीज टेस्ट कराने की सलाह? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

  • April 14, 2026

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सिर्फ डायबिटीज ही नहीं, बल्कि शरीर से जुड़ी हर बीमारी आजकल बहुत आम हो गई है। आप देखेंगे कि आज के समय में डायबिटीज की समस्या तो इतनी ज्यादा आम हो गई है, कि हर दूसरे घर में इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जरूर होगा। आम तौर पर, यह समस्या विशेष तौर पर, खराब जीवनशैली, मोटापे और अनुवांशिक कारणों की वजह से ही होती है। दरअसल, 45 साल से भी ज्यादा उम्र के लोगों को यह समस्या परेशान करती है। इस समस्या का संबंध सीधा ब्लड शुगर से होता है। डायबिटीज की समस्या असल में जिसे मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। असल में, डायबिटीज की समस्या का निर्माण तब होता है, जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है, या फिर उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसकी वजह से ही खून में ग्लूकोज की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आम तौर पर, डायबिटीज एक इस तरह की गंभीर बीमारी है, जो व्यक्ति के शरीर में जिंदगी भर बनी रहती है। दरअसल, इस बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, सिर्फ इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए, जो भी व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होता है, वो जिंदगी भर के लिए एक बड़ी परेशनी में घिर जाता है। इसी के चलते हर उस व्यक्ति को जो डायबिटीज जैसी समस्या से पीड़ित होता है, उसको नियमित रूप से अपना टेस्ट करवाते रहना चाहिए। ताकि समय- समय पर ब्लड शुगर के स्तर की सही और पूरी जानकारी मरीज को प्राप्त हो सके। 

आमतौर पर, समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत पाने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, न कि उसको आम समझ कर ऐसे ही नजरअंदाज कर देना चाहिए। क्योंकि, नजरअंदाज करने पर आपको कई तरह की सेहत समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है, इसलिए वक्त रहते समस्या का इलाज जरूरी होता है। दरअसल, आपको हर बार ये सुनने को मिला होगा, कि हर तीन महीने में डायबिटीज के मरीजों को डायबिटीज का टेस्ट करवाने की सलाह जरूर दी जाती है। ऐसे में, बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है, कि आखिर ऐसा करने के लिए क्यों कहा जाता है? दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हर तीन महीने में ब्लड शुगर टेस्ट कराना मरीज की सेहत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, इस दौरान इस तरह की सलाह इसलिए दी जाती है, क्योंकि क्योंकि इससे पिछले 8 से 12 हफ्तों के एवरेज ब्लड शुगर के लेवल की जानकारी प्राप्त होती है। ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि इससे मरीज की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। आम तौर पर, यह जांच इसलिए भी की जाती है, ताकि इस से दवाओं के असर के बारे में पता चल सके और साथ में किडनी और आंखों की गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सके। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं 

आखिर कौन-सा टेस्ट ब्लड शुगर की जांच के लिए महत्वपूर्ण होता है? 

अब इस बात से सभी वाकिफ हो गए हैं, कि हर तीन महीनों में डायबिटीज के मरीजों को अपना टेस्ट कराना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, विशेष तौर पर HbA1c टेस्ट कराने की सलाह प्रदान की जाती है। यह ब्लड शुगर की जांच के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बारे में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक HbA1c हीमोग्लोबिन से जुड़े ब्लड शुगर की मात्रा को मापने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। आम तौर पर, ऐसे में इस बात का ध्यान जरूर रखें, कि हीमोग्लोबिन आपके रेड ब्लड सेल्स का एक वह हिस्सा है होता है, जो दरअसल फेफड़ों के माध्यम से आपके पुरे शरीर में ऑक्सीजन को पहुंचाने का काम बखूबी करता है। दरअसल, डायबिटीज से पीड़ित मरीज अगर इस टेस्ट को करवाते हैं, तो इससे उन को अपने ब्लड शुगर के स्तर की सही जानकारी प्राप्त हो सकती है 

हर तीन महीने में डायबिटीज टेस्ट कराने के क्या-क्या फायदे हो सकते हैं?

हर तीन महीने में डायबिटीज टेस्ट कराने के फायदे निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. इलाज के असर की जानकारी प्राप्त होना 

दरअसल, इस तरह की स्थिति में, HbA1c टेस्ट करवाने से समस्या के दौरान दी गई दवा के प्रभाव की सही जानकारी प्राप्त होती है। आम तौर पर, ऐसे में विशेष बात यह है, कि इस टेस्ट के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त होती है, कि मरीज को अपनी डाइट या फिर जीवन शैली में किस तरह के बदलावों को शामिल करना चाहिए या फिर नहीं। 

  1. लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से बचाव होना 

HbA1c टेस्ट डायबिटीज के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल, इस टेस्ट को करवाने से मरीज लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से बच सकता है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें, कि डायबिटीज की दवा शरीर के अंग जैसे किडनी पर अपना बुरा प्रभाव डाल सकती है। 

निष्कर्ष: डायबिटीज की समस्या आम है, जिस पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। समस्या का पता चलते ही आपको तुरंत पाने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, न कि इसे नजरअंदाज कर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करंबा चाहिए। यह आम जरूर है, पर यह एक गंभीर बीमारी है, जो पीड़ित व्यक्ति के साथ जिंदगी भर रहती है। इसे जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता, केवल कोंट्रोक किया जा सकता है। इसलिए, डायबिटीज के मरीजों को हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट करवाने की सलाह जरूर दी जाती है, ताकि इससे मरीज की वर्तमान स्थिति के बारे में पता चल सके। पता चल सके कि मरीज के ऑर्गन ठीक तरीके से काम कर रहे हैं, या फिर नहीं और आगे कौन सी समस्याएं आ सकती हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और डायबिटीज जैसी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।