डायबिटीज यूरिन को कैसे प्रभावित करती है? दोनों के बीच के कनेक्शन को डॉक्टर से जानिए।

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डायबिटीज यूरिन को कैसे प्रभावित करती है? दोनों के बीच के कनेक्शन को डॉक्टर से जानिए।

  • August 10, 2025

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व्यक्ति के स्वस्थ रहने के लिए उसके यूरिन का बेहतर होना भी बहुत जरूरी होता है। आपको बता दें कि कई बार कई लोगों को यूरिन यानी पेशाब से जुड़ी समस्या बनी रहती है, जिसके कुछ मामलों में व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा हो सकता है। इसके कुछ मामलों में व्यक्ति का बार-बार पेशाब करना भी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। आपको बता दें कि डायबिटीज के मरीजों में भी कई बार यूरिन से जुड़ी समस्याओं को देखा जा सकता है। जिसके चलते एक व्यक्ति को मूत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। 

दरअसल डायबिटीज के मरीजों में भी कई बार पेशाब से जुड़ी समस्याओं को देखा जा सकता है। आमतौर पर डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिसके कारण व्यक्ति को मूत्र से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। दरअसल डायबिटीज के कुछ मरीजों को भी कई यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का सामना करना पड़ सकता है। अगर देखा जाये तो किडनी इसको बाहर निकालने की कोशिश करती है, जब व्यक्ति के शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाती है, जिसके कारण व्यक्ति को बार -बार पेशाब आ सकता है। आपको बता दें कि डायबिटीज और यूरिन का आपस में सीधा संबंध होता है। 

 

डायबिटीज यूरिन को कैसे प्रभावित करती है?

डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज व्यक्ति के पेशाब को प्रभावित कर सकती है। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने से पेशाब से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। दरअसल शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर आपको अपने पेशाब में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और आप भी यूरिन से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आप ऐसे में अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। कुछ मामलों में हालांकि आपको डिहाइड्रेशन के कारण भी पेशाब से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

 

डायबिटीज होने से पेशाब पर क्या असर पड़ता है?

दरअसल डॉक्टर की माने तो डायबिटीज के मरीजों में यूरिन पर कई तरीकों से प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि 

-इस दौरान आपके पेशाब में से झाग आ सकते हैं और इसके साथ ही ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने पर आपको कई बार पेशाब में से बदबू आने का भी सामना करना पड़ सकता है।

-डायबिटीज में आपको कई बार अपना पेशाब गाढ़ा और पीला दिखाई दे सकता है।

-कई बार डायबिटीज के मरीजों में ब्लैडर डिस्फंक्श की भी समस्या होती है, जिस से मरीज़ को बार-बार पेशाब करने के लिए जाना पड़ सकता है।

-अक्सर UTI की समस्या डायबिटीज के कुछ मरीजों में देखी जा सकती है, जिसकी वजह से मरीज के पेशाब में इंफेक्शन हो सकती है। 

 

क्या डायबिटीज में बार-बार पेशाब आ सकता है?

जी हां, डायबिटीज में एक मरीज को बार-बार पेशाब आ सकता है, दरअसल डायबिटीज के मरीजों में यह एक आम स्थिति है। आपको बता दें कि डायबिटीज के मरीजों में बार-बार पेशाब आने की वजह, शरीर में बढ़ा हुआ ग्लूकोज और ब्लड शुगर लेवल होता है। दरअसल एक व्यक्ति को डायबिटीज होने पर उसका शरीर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर पाने में सक्षम नहीं रहता है, जिसकी वजह से किडनी पर भी काफ़ी प्रभाव पड़ता है और इसके साथ ही  किडनी की कार्यक्षमता भी कम होने लगती है। इस तरह की स्थिति में किडनी ग्लूकोज को सही  तरीके से अवशोषित करने में असमर्थ होती है। एक यही वजह  है, कि मरीज को डायबिटीज के दौरान बार-बार पेशाब करने जाना पड़ सकता है। 

 

बार-बार पेशाब आने पर क्या करें?

-इस दौरान अगर आपको बार-बार पेशाब करने के लिए जाना पड़ रहा है, तो इसको बिलकुल भी नज़रअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

-अगर आपको बार बार पेशाब के लिए जाना पड़े, तो आपको ज्यादा मसालेदार खाना खाने के साथ-साथ कैफीन लेने से बचना चाहिए

-इस दौरान आपको शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार शराब का सेवन करने से भी आपको बार बार पेशाब आ सकता है।

-पेल्विक फ्लोर की एक्सरसाइज से आप अपनी बार बार पेशाब आने की समस्या को कम कर सकते हो। 

-बार-बार आने वाले पेशाब को कम करने के लिए आपको अपने वजन पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बढ़ा हुआ वजन आपके मूत्राशल पर दबाव डाल सकता है। 

-इस दौरान आप पानी को ठीक मात्रा में पिएं, जैसे बहुत ज्यादा या बहुत कम पानी न पिएं। दिन में 7 से 8 गिलास पानी पीना काफी है।

-बार बार पेशाब आने की समस्या को कम करने के लिए आप चाय-कॉफी को पीना कम करें। इस तरह की चीजें पेशाब ज्यादा लाने का कारण बनती हैं।

-इस दौरान आप रोज़ सुबह तुलसी के 2 से 3 पत्तों को चबा सकते हैं, या तुलसी की चाय पी सकते हैं। यह आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। 

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. व्यक्ति के पेशाब में शुगर ज्यादा होने से क्या होता है?

अगर किसी भी व्यक्ति के पेशाब में शुगर की मात्रा ज्यादा है, तो इस दौरान उस को पेशाब करते समय कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। 

प्रश्न 2. क्या पेशाब में शुगर किडनी को नुकसान पहुंचाता है?

जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर 180 mg/dl से ज्यादा हो जाता है, तो इससे किडनी पर दबाव पड़ने लगता है। इस दौरान किडनी की कार्यक्षमता भी कम हो सकती है।

प्रश्न 3. बार-बार पेशाब आना किसका संकेत हो सकता है?

आमतौर पर बार-बार पेशाब आने पर आपको पेशाब में इन्फेक्शन और प्रोस्टेट होने का संकेत हो सकती है। पर कुछ मामलों में बहुत ज्यादा पानी पीना शुगर बढ़ने का कारण भी हो सकता है। 

 

निष्कर्ष : एक व्यक्ति को सेहतमंद रहने के लिए उसके यूरिन का बेहतर होना बहुत जरूरी होता है। पर कई लोगों को पेशाब की समस्या बनी रहती है, जो कई समस्याओं की ओर इशारा करता है। कुछ मामलों में बार बार पेशाब आना डायबिटीज का संकेत होता है।  डॉक्टर के अनुसार डायबिटीज व्यक्ति के पेशाब को प्रभावित करती है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जिसके कारण व्यक्ति को मूत्र से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इस दौरान अगर आपको बार-बार पेशाब करने के लिए जाना पड़ रहा है, तो इसको बिलकुल भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए, इस दौरान अपने डॉक्टर से सलाह लेना एक बेहतर विकल्प होता है। अगर आपको भी डायबिटीज की समस्या है और इस दौरान आपको बार बार पेशाब आ रहा है और आप इस समस्या से परेशान हैं और आप भी इस समस्या का समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

AyurvedicUncategorized

Unlocking the Power of Ayurveda for Effective PCOS Treatment

  • January 16, 2024

  • 2065 Views

PCOS, also known as polycystic ovarian syndrome, is a common hormonal disorder that affects a large number of women. It can produce a variety of symptoms, including irregular periods, acne, weight gain, and hair loss. PCOS, if left untreated, can lead to more serious health issues such as infertility and diabetes. Fortunately, Ayurveda has excellent PCOS treatment alternatives that can help restore body balance and ease symptoms.

Our team of experts Ayurvedic doctor in Punjab at Sanjivani Ayurvedshala has helped many ladies overcome PCOS by utilizing natural, holistic therapies. Here’s how Ayurveda might help you maximize the effectiveness of PCOS treatment in Ludhiana.

Understanding PCOS According to Ayurveda

In Ayurvedic medicine, PCOS is known as “artava kshaya,” and that implies a deficiency or depletion of menstrual blood. This is believed to be brought about by an imbalance in the doshas, or energies, that control the body’s capabilities. In particular, PCOS is believed to be connected with an abundance of the Kapha dosha, which can cause congestion and stagnation in the reproductive system.

To treat PCOS, Ayurveda focuses around reestablishing balance to the doshas and working on in overall health and vitality. This might include a blend of dietary changes, lifestyle modifications, herbal remedies, and other normal treatments.

Dietary Recommendations for PCOS Treatment in Ludhiana

One of the important principles of Ayurveda is that food is medicine. This implies that the food sources you eat can significantly affect your health and prosperity. For ladies with PCOS, Ayurvedic dietary recommendations might include:

  • Eating warm, cooked food varieties that are easy to digest
  • Staying away from cold, raw, and processed foods varieties
  • Restricting sugar, caffeine, and liquor
  • Eating different new leafy foods
  • Integrating spices and herbs like turmeric, ginger, and cumin into dinners

Lifestyle Modifications for PCOS Treatment

In addition to dietary changes, Ayurveda also accentuates the significance of lifestyle modifications for PCOS treatment. This might include:

  • Getting regular activity to further develop circulation and metabolism
  • Rehearsing stress decreasing exercises like yoga and contemplation
  • Scheduling a proper sleep timetable to improve hormonal balance
  • Staying away from exposure to environmental toxins and chemicals

Herbal Remedies for PCOS

Ayurveda likewise utilizes various herbal remedies to assist with treating PCOS. These may include:

  • Shatavari:

    A powerful adaptogenic herb that can assist with directing chemicals and work on reproductive health.

  • Ashwagandha:

    Another adaptogenic herb that can assist with reduces stress and further develops energy levels.

  • Guggulu:

    A resin extract that can assist with balancing cholesterol levels and further develop insulin resistance.

  • Triphala:

    A blend of three natural products that can assist with supporting digestion and elimination.

By integrating these Ayurvedic remedies into your PCOS treatment, you can work on your general wellbeing and prosperity while reducing side effects and improving hormonal balance.

Conclusion

With a customized treatment plan that takes into account your different necessities and side effects, we can help you with restoring balance to your body and accomplish ideal health and health. So reach us today to schedule a consultation and begin your journey towards natural, holistic healing.