टाइफाइड के किन 3 बड़े मिथकों पर भूलकर भी नहीं करना चाहिए भरोसा? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
यह तो आपको पता ही होगा, कि टाइफाइड की समस्या ज्यादातर बरसात और गर्मियों के मौसम में होती है। जहां, गंदे पानी के सड़ने, खराब भोजन, नमी और गंदगी के कारण साल्मोनेला टाइफी नाम का बैक्टीरिया तेजी से पनपता है, जिकसी वजह से लोगों में टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी काफी रफ़्तार से फैलती है। कई जगहों पर इसके मामले काफी ज्यादा देखने को मिल सकते हैं, जिसमें मध्य प्रदेश का इंदौर, गुजरात का गांधीनगर और बेंगलुरु शामिल हो सकता है। इस समस्या के ज्यादातर लोगों में उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं, जिस को हम में से बहुत से लोग केवल फूड पॉइजनिंग या फिर वायरल संक्रमण समझकर या तो
नज़रअंदाज कर देते हैं, या फिर इसका घर पर ही इलाज करने लग जाते हैं। जिसकी कारण टाइफाइड जैसी समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। तेज बुखार, कमजोरी, पेट में दर्द और भूख न लगना जैसे लक्षण टाइफाइड का संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण महसूस होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसा न करने पर बीमारी जान पर भी बन सकती है।
माना कि टाइफाइड एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, पर लोगों में इस बीमारी से जुड़े कई मिथक प्रचलित हैं, जिस में टाइफाइड की बीमारी सिर्फ बाहर का या फिर गंदे भोजन का सेवन करने के कारण होती है, घरेलू नुस्खों या फिर फिल्टर किये हुए पानी से टाइफाइड की बीमारी को ठीक किया जा सकता है, एक बार टाइफाइड ठीक हो जाए तो दोबारा नहीं हो सकता, टाइफाइड बीमारी ज्यादातर लोगों में खांसी या फिर छींकने से फैलती है, टाइफाइड और टाइफस यह दोनों एक ही बीमारी होती हैं, टाइफाइड जैसी बीमारी केवल गांव या फिर दूर-दराज इलाकों में होने वाली बीमारी है, टाइफाइड सिर्फ़ गंभीर फ़ूड पोइज़निंग होती है, जैसी तमाम मिथकें शामिल हैं, जिन पर लोग आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। दरअसल, इन मिथकों वजह से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज में काफी ज्यादा देर हो जाती है, क्योंकि इस में पूरी जानकारी तो बिल्कुल नहीं होती है और काफी लोगों के इस पर भरोसा करने के कारण होती है जिसकी वजह से समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। इसलिए, सही और पूरी जानकारी वाली बातों पर ही अक्सर भरोसा करना चाहिए। जिससे की आपकी समस्या का इलाज समय पर और आगे चलकर किसी गंभीर का सामना न करना पड़े। इन मिथकों में ही कई लोग फसे रह जाते हैं और डॉक्टर के पास जाते ही नहीं हैं। इसलिए समस्या का पता चलते ही आपको सबसे पहले अपने डॉक्टर से ही संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इन मिथकों की सच्चाई के बारे में डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
टाइफाइड से जुड़े 3 मिथक और सच्चाई!
टाइफाइड से जुड़े ऐसे 3 मिथकों पर भरोसा तभी करना चाहिए, जब इनके बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो, वरना ऐसे किसी भी मिथक पर भूलकर भी भरोसा नहीं करना चाहिए, जिन में केवल आधी और भटकाने वाली जानकारी हो। इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए आप किसी अच्छे एक्सपर्ट से भी सलाह प्राप्त कर सकते हैं। टाइफाइड जैसी बीमारी से जुड़े 3 मिथक और सच्चाई निम्नलिखत अनुसार हैं, जिनपर भरोसा केवल पूरी जानकरी होने पर ही करना चाहिए:
मिथक: टाइफाइड की बीमारी केवल बाहर के या फिर खराब भोजन के सेवन से होती है।
सच्चाई: डॉक्टर के अनुसार, यह जानकारी पूरी नहीं है, केवल बाहर के खाने से टाइफाइड नहीं होता, अगर घर में खाना ठीक तरीके से न बनाया गया, हो तो भी यह बीमारी हो सकती है।
मिथक: लोगों में टाइफाइड खांसी या फिर छींकने से फैलता है।
सच्चाई: डॉक्टर का इस पर कहना है, कि टाइफाइड कभी भी हवा के माध्यम से नहीं फैलता, बल्कि यह मल-मूत्र और मुंह के रास्ते फैलता है। इसका अर्थ ये है, कि अगर टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के मल से खराब पानी या फिर खाना किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चला जाए, तो इससे बीमारी उस व्यक्ति में भी फैल सकती है। साफ हाथ, साफ पानी और साफ-सफाई से खाना बनाना और खाने से इस समस्या से बचाव किया जा सकता है।
मिथक: टाइफाइड और टाइफस यह दोनों एक ही बीमारी होती हैं।
सच्चाई: डॉक्टर के अनुसार बेशक टाइफाइड और टाइफस बोलने में एक जैसे हैं, पर यह दोनों बीमारियां अलग-अलग हैं। टाइफाइड जैसी बीमारी लोगों में एक साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से फैलती है और टाइफस जैसी बीमारी रिकेटसिया नाम के जीवाणु से फैलती है। टाइफस बीमारी लोगों को जूं या फिर पिस्सू के काटने पर होती है। इन दोनों बीमारियों का इलाज, कारण और रोकथाम तीनों ही अलग-अलग होते हैं। इसलिए, नाम एक सा होने पर दोनों बीमारियों को एक समझना गलत है।
निष्कर्ष: टाइफाइड एक गंभीर बीमारी है, जिसका समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पर कई लोगों में इस बीमारी को लेकर कई मिथक प्रचलित हैं, जैसे कि आपको इस लेख में बताये गए हैं। इन मिथकों की वजह से पीड़ित लोगों का समय पर इलाज नहीं हो पाता, जिससे समस्या और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। इसलिए, इन मिथकों पर भूलकर भी विश्वास न करें, क्योंकि यह आपकी बीमारी को और भी ज्यादा बढ़ावा दे सकती हैं। सही जानकारी के लिए आपको हमेशा अपने डॉक्टर से ही संपर्क करना चाहिए। टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए आप साफ़ पानी को उबालकर पी सकते हैं। बाहर का खाना खाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धोएं और साफ़ सफाई का ध्यान रखें। समय पर, इस समस्या की जांच कराएं और सही एंटीबायोटिक लें। अपनी दवाओं का कोर्स पूरा करें और टाइफाइड जैस गंभीर बीमारी को आम न समझें और साथ में न ही किसी मिथक पर विश्वास करके अपने आप कोई घरेलू इलाज करें। इस के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए और टाइफाइड जैसी गंभीर समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेद शाला के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।