डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स क्या हो सकते हैं? आयुर्वेदाचार्य से जानें

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डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स क्या हो सकते हैं? आयुर्वेदाचार्य से जानें

  • December 4, 2025

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असल में, बारिश किसी भी मौसम में हो सकती है और इससे मच्छरों की पैदावार काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आपको बता दें कि जब लगातार बारिश होती है, तो लोगों को मच्छरों से जुड़ी बीमारियों से किसी भी तरह की कोई राहत नहीं मिलती है। इस दौरान लोगों को कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, हर साल हमारी सरकारें देशभर के राज्यों में लगातार डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारीयों को कम करने की कोशिश में लगी रहती हैं, पर इस तरह की स्थिति में, मरीजों के ठीक होने में काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें, कि जो लोग मच्छरों से जुड़ी बीमारियों से काफी ज्यादा पीड़ित होते हैं, दरअसल, उनको तेज बुखार, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और प्लेटलेट्स की कमी जैसी कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। 

आम तौर पर, इसलिए ज्यादातर मरीजों को ठीक होने में काफी ज्यादा वक्त लग जाता है। पर, इस स्थिति में, इन दिक्कतों से उबरने के लिए आयुर्वेदिक डाइट टिप्स काफी ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं और इससे मरीजों को रिकवरी में, काफी जल्दी राहत मिल सकती है। ऐसे में, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स में, मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, ओट्स या रवा उपमा, हरी सब्जियों का शोरबा, मसाले के बिना सूप, आयुर्वेदिक हर्बल ड्रिंक्स, फल और ताजा फलों का जूस आदि शामिल हो सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स 

दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि इस दौरान मरीजों को अपनी दवाइयों के साथ-साथ अपनी रोजाना की डाइट पर भी महत्वपूर्ण ध्यान देना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। आपको बता दें, कि आयुर्वेद में, आपकी रोजाना की डाइट को ही समस्या के इलाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा माना गया है। आम तौर पर, हल्का और आसानी से पचने वाला और साथ में इम्युनिटी को बढ़ाने वाला भोजन शरीर की इलाज प्रक्रिया को काफी ज्यादा तेज करता है। इसलिए, इस तरह की स्थिति में, ज्यादातर मरीजों को जल्दी ठीक होने के लिए आराम और अपनी रोजाना की डाइट पर महत्वपूर्ण ध्यान देना चाहिए। इस स्थिति में, प्लेटलेट्स को बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

पचने वाला हल्के भोजन का सेवन करें 

बीमारी के दौरान, आसानी से पचने वाली डाइट में इन चीजों को शामिल किया जा सकता है, जैसे कि 

  1. मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन 
  2. दलिया, ओट्स या फिर रवा उपमे का सेवन 

फल और ताजा फलों का जूस

ज्यादातर, फलों में विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो मरीजों को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं। इसमें शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पपीता
  2. अनार और अमरूद
  3. कीवी और सेब

आयुर्वेदिक हर्बल ड्रिंक्स

दरअसल, आयुर्वेद में कई ऐसी नेचुरल ड्रिंक्स को बताया गया है, जो आम तौर पर, एक मरीज को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में हुए बुखार और कमजोरी में राहत प्रदान करती है। जैसे कि 

  1. तुलसी, अदरक और काली मिर्च का हलके काढ़े का सेवन 
  2. हल्दी वाले दूध का सेवन 
  3. गिलोय के रस का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

निष्कर्ष: डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए ज्यादातर मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर भी महत्वपूर्ण ध्यान देना चाहिए। दवाइयों के साथ आयुर्वेदिक डाइट में मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, ओट्स या रवा उपमा, हरी सब्जियों का शोरबा, मसाले के बिना सूप, आयुर्वेदिक हर्बल ड्रिंक्स, फल और ताजा फलों का जूस आदि शामिल करने से मरीज की इम्युनिटी और प्लेटलेट्स बढ़ सकते हैं। इस समस्या के दौरान, हर मरीज की स्थिति अलग-अलग हो सकती है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक दवा का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने और अगर आपको भी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी कोई समस्या है और आप इस समस्या का समाधान चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेद शाला में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से पीड़त लोगों को किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए?

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीजों को ज्यादातर, तली हुई, मसालेदार, खट्टी चीज़ें, पैकेज्ड और जंक फूड, ठंडा पानी, आइसक्रीम और ठंडी चीजों को खाने से बचना चाहिए।

प्रश्न 2. मच्छरों से होने वाली बीमारियों से ठीक होने के लिए कौन से आयुर्वेदिक टिप्स अपनाये जा सकते हैं?

मच्छर से होने वाली बीमारियों से ठीक होने के लिए आप, ताजा और हल्का गर्म भोजन, कम मात्रा में भोजन का सेवन, नींद पूरी करना और आराम करना और इसके साथ ही हल्की वॉक करना जैसे आयुर्वेदिक टिप्स को अपना सकते हैं।

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दिल की देखभाल के लिए 5 आयुर्वेदिक उपाय, जानें डॉक्टर से

  • November 26, 2025

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असल में, दिल हमारे शरीर के मुख्य अंगों में से एक है, जो शरीर में एक पंप की तरह काम करता है और साथ में, हमारे शरीर के सभी हिस्सों तक खून को पहुंचाता है। आपको बता दें, कि आयुर्वेद के अनुसार, दिल शरीर के तीन मुख्य अंगों में से एक माना जाता है। आम तौर पर, एक व्यक्ति के शरीर में, हवा, मेटल, सेल्स, एनर्जी और वेस्ट पदार्थों के प्रवाह के लिए अलग-अलग प्रकार के स्रोत ज़िम्मेदार होते हैं।

आम तौर पर, प्राण वाह स्रोत मुख्य रूप से शरीर में प्राण की मौजूदगी के लिए जिम्मेदार होते हैं। दरअसल, दिल प्राण वाह स्रोत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आपको बता दें, कि सभी मुख्य रक्त वाहिकाएं दिल से होकर ही गुजरती हैं। इसके साथ ही दिल हमारी आत्मा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आम तौर पर, हमारा दिल उस तरल पदार्थ से भी जुड़ा होता है, जो हमारी चेतना या फिर आत्मा को बचा कर रखता है और एक इंसान को ज़िंदा रखता है। इसके साथ ही, आधुनिक विज्ञान भी दिल की महत्ता पर काफी ज्यादा जोर देते हैं। दरअसल, दिल को जीवन का आधार माना जाता है, इसलिए हम को अपने दिल की सही तरीके से देखभाल करनी चाहिए। बता दें, कि दिल प्यार की भावनाओं का भी आधार होता है, इसलिए, प्यार, तालमेल और शांति की नींव रखने के लिए एक व्यक्ति के पास सेहतमंद दिल का होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, जीवन को जीवन के लिए अपने दिल की देखभाल करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसकी देखभाल के लिए आप कुछ आयुर्वेदिक उपाय को भी अपना सकते हैं। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि वह कौन से आयुर्वेदिक उपाय हैं, जिन का इस्तेमाल करके आप अपने दिल की देखभाल कर सकते हैं?

दिल की देखभाल के लिए 5 आयुर्वेदिक उपाय

  1. दरअसल आयुर्वेद के अनुसार, दिल की बीमारी का मुख्य कारण अमा होता है। आपको बता दें, कि अमा एक तरीके का जहरीला पदार्थ होता है, जो हमारे शरीर में ना पचने वाले भोजन से पैदा होता है। इसलिए, इस दौरान हर किसी को इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, कि एक व्यक्ति को सिर्फ उतनी ही मात्रा में और उसी प्रकार के भोजन का सेवन करना चाहिए, जिस को वह अच्छे तरीके से हजम कर सकें। 
  2. आम तौर पर, अगर आप अपने दिल की देखभाल करना चाहते  हैं, तो बार -बार या फिर बहुत ज्यादा खाने का सेवन करने से अपना आप का बचाव करें। इसके लिए आप अपनी सुबह की डाइट में और रात की डाइट में हलके भोजन को शामिल करें। इसके साथ ही आपको दोपहर में अच्छे और सेहतमंद खाने का सेवन करना चाहिए। दिल को सेहतमंद रखने के लिए, दूध से बनी खाने पीने की चीजें, तला हुआ खाना, ज्यादा ठंडी चीजें और इसके साथ ही शरीर में, तेजाब बनाने वाली चीजों का कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही, मैदे से बनी चीजें से भी अपना बचाव करना चाहिए। आपको बता दें कि पशु उत्पाद और मुख्य रूप से लाल मांस दिल और शरीर की सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होते हैं, क्योंकि शरीर को इस तरह के भोजन को पचाने में काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती और काफी समय भी लगता है। इससे हमारे पेट में कई तरह के हानिकारक पदार्थ उत्पान हो जाते हैं, जिसका बुरा असर हमारी दिल की सेहत पर पड़ता है, इसलिए इनके सेवन से अपना बचाव करना चाहिए। 
  3. दिल की सेहत के लिए आमला (भारतीय हंसबेरी) काफी ज्यादा फायदेमंद होती हैं। आम तौर पर, इसको ताज़ा, सूखा या फिर पाउडर के रूप में खाया जा सकता है। 
  4. आम तौर पर, दिल की सेहत के लिए चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते हैं। इसलिए इन का सेवन ज्यादातर नहीं करना चाहिए। इस तरह की चीजों को छोड़ देना ही दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है। क्योंकि ये लिवर और पाचन शक्ति को कमजोर बनाते हैं और अमा जैसे जहरीले पदार्थों को पैदा करते हैं। 
  5. तांबे के बर्तन में रात भर रखे पानी का सेवन करने से दिल मजबूत और सेहतमंद होता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, दिल शरीर के तीन मुख्य अंगों में से एक माना जाता है। अपने दिल की देखभाल करने के लिए आप इस लेख में बताए गए आयुर्वेदिक उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं, और अपने दिल को सेहतमंद रख सकते हैं। अगर आपको दिल से या फिर किसी से भी जुड़ी कोई भी गंभीर बीमारी है और आप इसका आयुर्वेदिक इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेद शाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।