दिल की देखभाल के लिए 5 आयुर्वेदिक उपाय, जानें डॉक्टर से

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दिल की देखभाल के लिए 5 आयुर्वेदिक उपाय, जानें डॉक्टर से

  • November 26, 2025

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असल में, दिल हमारे शरीर के मुख्य अंगों में से एक है, जो शरीर में एक पंप की तरह काम करता है और साथ में, हमारे शरीर के सभी हिस्सों तक खून को पहुंचाता है। आपको बता दें, कि आयुर्वेद के अनुसार, दिल शरीर के तीन मुख्य अंगों में से एक माना जाता है। आम तौर पर, एक व्यक्ति के शरीर में, हवा, मेटल, सेल्स, एनर्जी और वेस्ट पदार्थों के प्रवाह के लिए अलग-अलग प्रकार के स्रोत ज़िम्मेदार होते हैं।

आम तौर पर, प्राण वाह स्रोत मुख्य रूप से शरीर में प्राण की मौजूदगी के लिए जिम्मेदार होते हैं। दरअसल, दिल प्राण वाह स्रोत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आपको बता दें, कि सभी मुख्य रक्त वाहिकाएं दिल से होकर ही गुजरती हैं। इसके साथ ही दिल हमारी आत्मा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आम तौर पर, हमारा दिल उस तरल पदार्थ से भी जुड़ा होता है, जो हमारी चेतना या फिर आत्मा को बचा कर रखता है और एक इंसान को ज़िंदा रखता है। इसके साथ ही, आधुनिक विज्ञान भी दिल की महत्ता पर काफी ज्यादा जोर देते हैं। दरअसल, दिल को जीवन का आधार माना जाता है, इसलिए हम को अपने दिल की सही तरीके से देखभाल करनी चाहिए। बता दें, कि दिल प्यार की भावनाओं का भी आधार होता है, इसलिए, प्यार, तालमेल और शांति की नींव रखने के लिए एक व्यक्ति के पास सेहतमंद दिल का होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, जीवन को जीवन के लिए अपने दिल की देखभाल करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसकी देखभाल के लिए आप कुछ आयुर्वेदिक उपाय को भी अपना सकते हैं। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि वह कौन से आयुर्वेदिक उपाय हैं, जिन का इस्तेमाल करके आप अपने दिल की देखभाल कर सकते हैं?

दिल की देखभाल के लिए 5 आयुर्वेदिक उपाय

  1. दरअसल आयुर्वेद के अनुसार, दिल की बीमारी का मुख्य कारण अमा होता है। आपको बता दें, कि अमा एक तरीके का जहरीला पदार्थ होता है, जो हमारे शरीर में ना पचने वाले भोजन से पैदा होता है। इसलिए, इस दौरान हर किसी को इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, कि एक व्यक्ति को सिर्फ उतनी ही मात्रा में और उसी प्रकार के भोजन का सेवन करना चाहिए, जिस को वह अच्छे तरीके से हजम कर सकें। 
  2. आम तौर पर, अगर आप अपने दिल की देखभाल करना चाहते  हैं, तो बार -बार या फिर बहुत ज्यादा खाने का सेवन करने से अपना आप का बचाव करें। इसके लिए आप अपनी सुबह की डाइट में और रात की डाइट में हलके भोजन को शामिल करें। इसके साथ ही आपको दोपहर में अच्छे और सेहतमंद खाने का सेवन करना चाहिए। दिल को सेहतमंद रखने के लिए, दूध से बनी खाने पीने की चीजें, तला हुआ खाना, ज्यादा ठंडी चीजें और इसके साथ ही शरीर में, तेजाब बनाने वाली चीजों का कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही, मैदे से बनी चीजें से भी अपना बचाव करना चाहिए। आपको बता दें कि पशु उत्पाद और मुख्य रूप से लाल मांस दिल और शरीर की सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होते हैं, क्योंकि शरीर को इस तरह के भोजन को पचाने में काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती और काफी समय भी लगता है। इससे हमारे पेट में कई तरह के हानिकारक पदार्थ उत्पान हो जाते हैं, जिसका बुरा असर हमारी दिल की सेहत पर पड़ता है, इसलिए इनके सेवन से अपना बचाव करना चाहिए। 
  3. दिल की सेहत के लिए आमला (भारतीय हंसबेरी) काफी ज्यादा फायदेमंद होती हैं। आम तौर पर, इसको ताज़ा, सूखा या फिर पाउडर के रूप में खाया जा सकता है। 
  4. आम तौर पर, दिल की सेहत के लिए चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान बिल्कुल भी अच्छे नहीं होते हैं। इसलिए इन का सेवन ज्यादातर नहीं करना चाहिए। इस तरह की चीजों को छोड़ देना ही दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है। क्योंकि ये लिवर और पाचन शक्ति को कमजोर बनाते हैं और अमा जैसे जहरीले पदार्थों को पैदा करते हैं। 
  5. तांबे के बर्तन में रात भर रखे पानी का सेवन करने से दिल मजबूत और सेहतमंद होता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, दिल शरीर के तीन मुख्य अंगों में से एक माना जाता है। अपने दिल की देखभाल करने के लिए आप इस लेख में बताए गए आयुर्वेदिक उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं, और अपने दिल को सेहतमंद रख सकते हैं। अगर आपको दिल से या फिर किसी से भी जुड़ी कोई भी गंभीर बीमारी है और आप इसका आयुर्वेदिक इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेद शाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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पिंक साल्ट क्या है? इसे सेहतमंद क्यों माना जाता है और आयुर्वेद नमक के बारे में क्या कहता है, जानिए डॉक्टर से

  • November 20, 2025

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आपको बता दें, कि भारत में लगभग 94.3 प्रतिशत घरों में काफी ज्यादा आयोडीन वाले नमक का इस्तेमाल किया जाता है। आम तौर पर, जैसे कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में लिखा गया है। दरअसल, इससे इस बात का पता चलता है, कि भारत में लोग नमक के द्वारा आयोडीन की काफी मात्रा प्राप्त कर रहे हैं, आम तौर पर, जिसकी सहायता से थायराइड से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक रोका और ठीक किया जा सकता है। पर क्या वाकई खाने में, पिंक सॉल्ट का इस्तेमाल करना सेहतमंद होता है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि आखिर पिंक साल्ट क्या होता है और आखिर आयुर्वेद नमक के बारे में क्या कहता है? 

पिंक साल्ट क्या है?

अपने अक्सर यह देखा होगा, कि पहले लोग साधारण नमक का इस्तेमाल करते थे, पर अब ज्यादातर लोगों के घरों में साधारण नमक की जगह पिंक सॉल्ट यानी कि सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाने लगा है। असल में, यह नमक दिखने में हलके गुलाबी रंग का होता है और इसकी वजह से ही इसको हिमालयन पिंक साल्ट के नाम से जाना जाता है। आम तौर पर, इसमें ज्यादातर कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कुछ महत्वपूर्ण मिनरल्स पाए जाते हैं, पर यह बहुत ही कम मात्रा में ही होते हैं। आपको बता दें, कि इसका स्वाद आम नमक जितना तेज नहीं होता है, पर यह हल्का और खाने में थोड़ा मीठा हो सकता है। आम तौर पर, इस को अक्सर सेहतमंद माना जाता है, क्योंकि यह कम रिफाइंड होता है और कुदरती माना जाता है। 

लोग द्वारा इसे इतना सेहतमंद क्यों माना जाता है?

आम तौर पर, लोगों द्वारा इस को सेहतमंद इसलिए माना जाता है, क्योंकि ज्यादातर लोगों का मानना है, कि इसमें मौजूद मिनरल्स शरीर को विशेष रूप से लाभ प्रदान करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इसके साथ यह भी कहा जाता है, कि पिंक सॉल्ट शरीर से जहरीले पदार्थों को डिटॉक्स और उनको दूर करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। इसी तरह कुछ लोगों का मानना है, कि टेबल साल्ट की तुलना में इसमें बहुत ही कम सोडियम पाया जाता है, इसलिए दिल की सेहत के लिए यह अच्छा होता है। 

आयुर्वेद नमक के बारे में क्या कहता है?

तो चलिए अब बात करते हैं, आयुर्वेद की, कि आयुर्वेद नमक के बारे में क्या कहता है, तो आपको इसके बारे में बता दें कि आयुर्वेद नमक को न केवल स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ मानता है, बल्कि इसे नमक के रस की श्रेणी में भी रखता है। 

आयुर्वेद में नमक के रस का महत्व

आपको बता दें, कि आयुर्वेद के अनुसार नमक असल में, एक व्यक्ति की भूख को बढ़ाने, पाचन को सुधारने और खाने के स्वाद को संतुलित करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। आम तौर पर, यह हमारे शरीर में वात दोष को काफी ज्यादा कम करने में मदद करता है और हमारे खाने को आसानी से पचने लायक बनाता है।

आयुर्वेद में संतुलित मात्रा में नमक का उपयोग

दरअसल, इसके बारे में आयुर्वेद कहता है, कि नमक सेहत के लिए काफी ज्यादा जरूरी होता है, पर इस का संतुलन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आपको बता दें, कि न तो नमक को अपने खाने से पूरी तरह से अलग करना चाहिए और न ही खाने में इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। आम तौर पर, सही मात्रा में खाया जाने वाला नमक असल में शरीर के रस, धातु और ऊर्जा को संतुलित रखता है। 

ज़्यादा या कम नमक के नुकसान

दरअसल, इस तरह की स्थिति में, आयुर्वेद का सीधा और साफ़ सन्देश यही है, कि नमक बेशक शरीर के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, पर अपने शरीर को सेहतमंद रखने के लिए इसका सही चुनाव और संतुलन बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, जैसे कि 

  1. अगर आप काफी ज्यादा नमक का सेवन करते हैं, तो यह आपके शरीर में कई तरह की समस्यायों, जैसे कि रक्तचाप, त्वचा से जुडी समस्याएँ और दिल की बिमारिओं को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है। 
  2. अगर आप अपने खाने में किसी भी तरह से नमक का इस्तेमाल नहीं करते हैं, मतलब आप नमक बिल्कुल नहीं खाते हैं, तो इससे कमजोरी, थकान और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

निष्कर्ष

पिंक सॉल्ट दिखने में हलके गुलाबी रंग का होता है और इसकी वजह से ही इसको हिमालयन पिंक सॉल्ट के नाम से जाना जाता है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कुछ महत्वपूर्ण मिनरल्स पाए जाते हैं, पर यह बहुत ही कम मात्रा में ही होते हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है, कि इसमें मौजूद मिनरल्स शरीर को विशेष रूप से लाभ प्रदान करते हैं और यह शरीर से जहरीले पदार्थों को डिटॉक्स करता है। इसलिए लोगों द्वारा इसे सेहतमंद माना जाता है। शरीर को सेहतमंद रखने के लिए इसका सही चुनाव और संतुलन बहुत जरूरी होता है। अगर आपको ज्यादा नमक के कारण किसी भी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और आप इसका इलाज और इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।