बार-बार चिंता करने से न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक समस्याएं भी बढ़ती हैं, आयुर्वेद में जानें इसका उपचार

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बार-बार चिंता करने से न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक समस्याएं भी बढ़ती हैं, आयुर्वेद में जानें इसका उपचार

  • November 16, 2025

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आज के समय में चाहे वह बच्चा हो या फिर जवान सभी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं। आपको बता दें, कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर हुए हालिया सर्वेक्षणों के माध्यम से यह पता चलता है, कि लगभग 13.9 प्रतिशत वयस्क मानसिक विकृति का अनुभव करते हैं, आम तौर पर, जिसमें चिंता और तनाव भी शामिल हैं। आपको बता दें, कि सर्वेक्षण के माध्यम से पता चली यह संख्या बताती है, कि एक व्यक्ति को होने वाली चिंता केवल एक दिमाग ही समस्या नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्ति के पुरे जीवन और शरीर पर अपना असर दिखा सकती है। 

आज के समय में लोग अपने काम को लेकर काफी ज्यादा चिंता में डूबे रहते हैं और आज की चुनौतियों से भरी ज़िंदगी में, आपकी चिंता आपको लगातार परेशान कर सकती है। आपको बता दें, कि ज्यादातर लोग, अपने काम के बोझ को लेकर, रिश्तों की उलझनों को लेकर, सेहत की चिंताओं को लेकर और इसके साथ ही आर्थिक असुरक्षा को लेकर काफी ज्यादा चिंता में डूबे रहते हैं। इसकी वजह से ही लोगों में चिंता होना एक आम बात हो गयी है। जो कि एक व्यक्ति की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यहां तक की यह कई समस्याओं कारण भी बन सकती है। इसलिए, इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में, इसके डॉक्टर से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि बार-बार चिंता करने से मानसिक और शारीरिक समस्याएं बढ़ने पर, आयुर्वेद में इसके कौन से उपचार उपलब्ध हैं?

आयुर्वेद और तनाव

आपको बता दें, कि आयुर्वेद इस तरह की स्थिति में एक सम्पूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करता है। असल में, आयुर्वेद न सिर्फ आपके मानसिक लक्षणों को अच्छे तरीके से देखता है, बल्कि यह आपके पुरे शरीर (पाचन, नींद, हार्मोन और प्रतिरक्षा प्रणाली) को भी एक साथ जांचता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, आयुर्वेद का यह मानना है, कि जब एक व्यक्ति का मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं, तो असल में, तभी एक व्यक्ति तनाव-मुक्त महसूस कर सकता है। 

चिंता के बढ़ने के क्या कारण होते हैं?

दरअसल, आज के समय में चिंता इतनी ज्यादा बढ़ गई है, कि इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. काम और पढ़ाई का दबाव होना। 
  2. आर्थिक परेशानी होना। 
  3. रिश्तों में खटास का पैदा होना।
  4. स्वास्थ्य की काफी ज्यादा चिंता होना। 

बार-बार चिंता करने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

असल में, चिंता हमारे शरीर पर कई तरीकों से असर डाल सकती है। बता दें कि चिंता सिर्फ़ मन की समस्या नहीं है, इससे हमारा शरीर भी प्रभावित हो सकता है। इस को मुख्य तीन हिस्सों में बाँटा गया है, जैसे कि 

  1. मानसिक प्रभाव:

. बेचैनी और घबराहट होना। 

. नींद न आने की समस्या होना। 

. मूड स्विंग होना। 

  1. शारीरिक प्रभाव:

. दिल की धड़कन बढ़ना। 

. पाचन का बिगड़ना। 

. थकान और सिरदर्द होना। 

  1. व्यवहारिक बदलाव:

. खानपान में गड़बड़ी उत्पन्न होना। 

. तनाव के कारण लोगों से दूरी बना लेना। 

. नशे की आदत लग जाना। 

शरीर में चिंता और तनाव के कारण कौन-कौन सी समस्याएँ बढ़ सकती हैं?

चिंता और तनाव के कारण शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती है, जैसे कि 

  1. पाचन तंत्र में गड़बड़ी 

. एसिडिटी होना। 

. कब्ज या दस्त लगना। 

. पेट फूलना। 

  1. नींद की समस्या

. नींद की कमी होना। 

. थकान होना। 

. सुस्ती और चिड़चिड़ापन होना। 

  1. हार्मोनल असंतुलन

. महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होना। 

. PCOS जैसी समस्या बढ़ना।

. पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन स्तर पर असर पड़ना। 

आयुर्वेद में चिंता और तनाव को दूर करने के लिए कौन-कौन से उपचार उपलब्ध हैं?

असल में, आयुर्वेद में इसके लिए कई प्राकृतिक उपाय उपलब्ध हैं, जैसे कि 

  1. पंचकर्म थेरेपी

दरअसल, पंचकर्म आयुर्वेद का गहरा उपचार है, जो मन को शांत करता है। 

. शिरोधारा: माथे पर लगातार गर्म तेल डालने की प्रक्रिया करना। 

. नस्य: औषधीय तेल को नाक के रास्ते से डालना।

. स्वेदन (भाप उपचार): हर्बल भाप देने से तनाव कम होता है।

. अभ्यंग (तेल मालिश): पूरे शरीर पर औषधीय तेल से मालिश करना। 

  1. आयुर्वेदिक औषधियां

असल में, आयुर्वेद में कई तरह की जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं, जो चिंता और तनाव को प्राकृतिक रूप से कम करती हैं जैसे कि, 

. अश्वगंधा

. ब्राह्मी

. जटामांसी

. शंखपुष्पी

. लैवेंडर

निष्कर्ष

आज की चुनौतियों से भरी ज़िंदगी में, तनाव और चिंता आपको लगातार परेशान कर सकती है। इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि एक व्यक्ति द्वारा बार-बार चिंता करने से न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक समस्याएं भी काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद में चिंता और तनाव को दूर करने के लिए, पंचकर्म थेरेपी और आयुर्वेदिक औषधियां जैसे कई उपचार उपलब्ध हैं, जिससे चिंता और तनाव का इलाज किया जा सकता है। अगर आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको भी बार-बार चिंता या फिर तनाव जैसी कोई समस्या है, और इसके इलाज के लिए आप आयुर्वेदिक इलाज ढूंढ रहे हैं, तो आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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काम करते हुए खाने से, हमें क्यों नहीं मिलता असली पोषण? जानिए आयुर्वेद से

  • November 12, 2025

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आज के समय में, सभी लोग अपने कामकाज में व्यस्त होने की वजह से अपने खाने -पीने पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं। आम तौर पर, भारत में लगभग 6 करोड़ लोग, जो कि कामकाजी वर्ग का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा हैं, “शिफ्ट वर्क” जैसे नर्सिंग, स्वास्थ्य सेवाओं आदि में काम करते हैं, और काम करते हुए खाना, इस जीवनशैली का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा बन चूका है। काम करते हुए खाना, कई लोगों की आदत बन गई है और कई लोगों की मजबूरी, जो की सेहत के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होती है। आपको बता दें, कि हाल ही में हुए, एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग ख़ास तौर पर भारत में, शिफ्ट वर्क करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर आधारित हैं, दरअसल लंबे काम के घंटे और अव्यवस्थित काम का समय उनके खान- पान की आदतों में गड़बड़ी को पैदा करते हैं। आम तौर पर, जिसका सीधा प्रभाव उनकी पाचन शक्ति और पोषण के ऊपर पड़ता है। असल में, यह खोज बताती है, कि गैर-सेहतमंद डाइट और तनाव, जो कि हमेशा काम के दबाव और नींद की कमी के साथ संबंधित होते हैं, हमारे खाने की आदतों को काफी ज्यादा प्रभावित करते हैं। 

आम तौर पर, जब आप अपना भोजन काम करते हुए और जल्दी से अपना ध्यान भटकाते हुए करते हैं, तो ऐसा करना सिर्फ आपकी एक आदत ही नहीं बन जाती, बल्कि यह आपकी सेहत और पोषण पर गहरा प्रभाव डालती है। सेहत के लिए इस तरह की आदतें सही नहीं होती हैं। काम करते हुए खाने से, हमें असली पोषण क्यों नहीं मिलता? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

क्या आप भी काम करते हुए खाना खाते हैं? 

आज के समय में, कई लोग कंप्यूटर पर बैठे- बैठे खाना खा लेते हैं, या फिर मोबाइल पर मीटिंग में भाग लेते वक्त जल्दी- जल्दी खाने का सेवन कर लेते हैं, इतना ही नहीं कई बार काम का इतना दबाव होता है, कि लोग सोचते हैं, कि खाना खाने में अलग से वक्त क्यों ही बर्बाद करें? आम तौर पर, इस तरह की सोच आगे चलकर एक बुरी आदत बन जाती है। इस दौरान, आप महसूस भी नहीं कर पाते हैं और खाना आपके लिए एक मशीनी काम बन जाता है, बिना स्वाद लिए, बिना ध्यान दिए, बस अपने पेट को भरने के लिए खाने का सेवन करते हैं। 

हालांकि, ऐसा करते वक्त क्या आपने कभी सोचा है, कि जब भी आप इस तरीके से खाने का सेवन करते हैं, तो इससे आपका मन और शरीर किस तरीके का महसूस करता है? शायद आप इस दौरान काफी ज्यादा थकावट खाने का सेवन करने के बाद भी भारीपन और पाचन में गड़बड़ी महसूस करते हैं, यह सभी लक्षण काम करते हुए खाना, जैसी आदत का नतीजा होते हैं। 

काम करते हुए खाने से पाचन क्यों बिगड़ता है?

काम करते हुए खाने से पाचन कई कारणों से बिगड़ सकता है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं, जैसे कि 

  1. एक साथ दो काम करने से ध्यान बंट जाता है। 
  2. काम के दौरान खाना खाने से ठीक से चबाना नहीं हो पाता है। 

काम करते हुए खाने से, पोषण क्यों अधूरा रह जाता है? 

जब आप काम करते हुए खाने का सेवन करते हैं, तो इस दौरान आपका पूरा ध्यान भोजन पर नहीं, बल्कि अपना पेट भरने पर होता है। इस दौरान, अन्न का पूरा रस और गुण आपके शरीर को नहीं मिल पाते हैं, क्योंकि भोजन को अच्छे से चबाने और स्वाद लेने की प्रक्रिया अपना पूरा ध्यान और वक्त माँगती है। अगर खाते वक्त आपका ध्यान काम पर है, तो आपके शरीर को पोषण नहीं मिल पाता है। 

इस पर, आयुर्वेद का कहना है, कि जिस तरह की स्थिति में आप खाते हैं, आम तौर पर, वही ऊर्जा आपका भोजन भी ग्रहण करता है, चाहे वो सकारात्मक हो या फिर नकारात्मक। 

निष्कर्ष :

सेहतमंद खाना न सिर्फ आपके पेट और शरीर को भरने का काम करता है, बल्कि आपके विचार, ऊर्जा, और आपके मन को भी आकार देता है। जब आप काम करते हुए खाने का सेवन करते हैं, तो इस दौरान आपका पूरा ध्यान भोजन पर नहीं, बल्कि अपना पेट भरने पर होता है और आपको लगता है, कि आपने अपना कीमती समय काम के लिए बचा लिया है। पर असल में, आप इस भोजन से मिलने वाले पोषण को खो देते हैं ,एक यही कारण है, कि आप अक्सर खाना खाने के बाद, थकान और बेचैनी महसूस होती है। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आपको भी खाना खाने की ऐसी आदत से पोषण या फिर पेट के संबंधित कोई समस्या हो गई है और आप इसका आयुर्वेदिक इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।