आयुर्वेदाचार्य से जानें, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स

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आयुर्वेदाचार्य से जानें, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से रिकवरी में प्लेटलेट्स बढ़ाने के आयुर्वेदिक डाइट टिप्स

  • November 6, 2025

  • 697 Views

दरअसल, पुरे देशभर में, अगस्त के महीने में लगातार बारिश होती है और इसी महीने में मच्छरों की पैदावार बढ़ जाती है। जिससे कि, कई तरह की सेहत समस्यायों में बढ़ोतरी होती है और बिमारिओं से बिल्कुल भी रहत नहीं मिलती है। आमतौर पर, पूरे देश भर में, मच्छरों की वजह से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती है और इस दौरान ज्यादातर मरीजों को रिकवरी में समस्या होती है। आपको बता दें, कि मच्छरों से जुड़ी बीमारियों से पीड़त मरीजों को बहुत ही ज्यादा तेज बुखार जोड़ों और मांसपेशियों में काफी ज्यादा दर्द, कमजोरी और साथ ही प्लेटलेट्स की कमी होना जैसी कई गंभीर समस्याएं होती हैं। दरअसल, इस तरह की स्थिति के कारण मरीज को रिकवर होने के लिए काफी ज्यादा समय लग जाता है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रिकवरी में, आयुर्वेदिक डाइट टिप्स, मरीजों को बहुत ही ज्यादा जल्दी राहत प्रदान कर सकते हैं। तो आइये इस लेख के माध्यम से इन आयुर्वेदिक डाइट टिप्स के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। 

आयुर्वेदिक तरीकों से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से करें रिकवरी 

डॉक्टर के अनुसार, इस तरह की बीमारियों में दवाइयों के साथ- साथ मरीजों को अपने खाने-पीने पर भी ध्यान देना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। दरअसल, आयुर्वेद में, आहार को ही उपचार का एक बड़ा हिस्सा माना जाता है। बता दें, कि हल्के, सुपाच्य और हमारी इम्युनिटी को बढ़ाने वाले भोजन असल में, शरीर की उपचार प्रक्रिया को काफी ज्यादा तेज़ करते हैं। इसलिए पीड़ित मरीज को जल्दी ठीक होने के लिए अपनी डाइट और आराम दोनों पर सावधानीपूर्वक ध्यान देना चाहिए। आप इस दौरान इस तरह के भोजन को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, जैसे कि 

पचने वाला हल्का भोजन 

बीमारी के दौरान, डाइजेशन कमजोर हो जाता है और इस दौरान, आसानी से पचने वाले भोजन को ही अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, जैसे कि 

  1. मूंग दाल की खिचड़ी
  2. दलिया, ओट्स या मसाले के बिना वाला सूप

ताजे फल

आम तौर पर, फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं, जो मरीज को जल्द रिकवर होने में काफी ज्यादा मदद करते हैं। अपनी डाइट में आप इन फलों को शामिल कर सकते हैं, जैसे कि 

  1. पपीता: पपीता प्लेटलेट्स को बढ़ाने में काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। 
  1. अनार और अमरूद: इन फलों का सेवन करने से आयरन की कमी दूर होती है। 
  1. कीवी और सेब: यह दोनों फल विटामिन C से भरपूर होते हैं, जो इम्युनिटी को बढ़ाने में काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं। 
  1. नारियल पानी: आमतौर पर, यह हमारे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में लाभदायक होता है। 

आयुर्वेदिक हर्बल ड्रिंक्स

दरअसल, आयुर्वेद में कई तरह के पेय पदार्थ उपलब्ध हैं, जो आमतौर पर, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी समस्या में होने वाले बुखार और साथ ही कमजोरी में राहत प्रदान करता है। 

  1. तुलसी, अदरक और काली मिर्च का हल्का काढ़ा
  2. हल्दी वाला दूध

ताकत और ऊर्जा प्रदान करने वाले भोजन 

दरअसल, मच्छरों से होने वाली बीमारियों की वजह से मरीजों में काफी लम्बे वक्त तक के लिए कमजोरी बनी रहती है। इसलिए इस दौरान, इस तरह के भोजन का सेवन करना चाहिए, जो आपको ताकत और ऊर्जा प्रदान कर सके। जैसे कि 

  1. देसी घी 
  2. खजूर और मुनक्का
  3. च्यवनप्राश (डॉक्टर की सलाह पर लें।)

मच्छरों से जुड़ी बीमारियों से ठीक होने के लिए आयुर्वेदिक टिप्स

डॉक्टर के अनुसार, मरीजों को अपने आहार के साथ- साथ कुछ आयुर्वेदिक टिप्स को भी अपनाना चाहिए, इससे रिकवरी तेज होती है। जैसे कि 

  1. भोजन ताजा और हल्का गर्म खाना चाहिए।
  2. रिकवरी में पूरी नींद और आराम करना चाहिए।

निष्कर्ष:

दरअसल, बारिश के मौसम में मच्छरों से होने वाले डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी समस्याओं से ठीक होने के लिए दवाइयों के साथ-साथ, अपने खान पान और जीवन शैली पर भी ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही, आयुर्वेदिक डाइट टिप्स का पालन करने से, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से पीड़ित मरीज की इम्युनिटी और प्लेटलेट्स में बढ़ोतरी हो सकती है। इस दौरान, सभी की स्थिति एक जैसी नहीं होती है, इसलिए इस दौरान किसी भी आयुर्वेदिक दवा लेने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। अगर आपको भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर आपको मच्छरों से डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया हो गया है और आप इसका आयुर्वेदिक इलाज ढूंढ रहे हैं, तो आप अजा ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके डॉक्टर से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या सोरायसिस एक फैलने वाली बीमारी है? जाने सोरायसिस के 7 मिथकों के जवाब डॉक्टर से

  • October 25, 2025

  • 405 Views

दरअसल सोरायसिस एक दीर्घकालिक त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा में गंभीर खुजली और लालिमा आ जाती है। आमतौर पर सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिस में त्वचा के सेल तेजी से बढ़ने लगते हैं और इसकी वजह से त्वचा पर लाल पपड़ीदार परत बनने लग जाती है। दरअसल इस लाल पपड़ीदार परत में खुजली भी होती है। आपको बता दें कि सोरायसिस के पैच लोगों की टांगों, कोहनी, उंगलियों, सिर, घुटनों, चेहरे, हथेलियों, पीठ के निचले हिस्से और पैरों के तलवों पर होते हैं। आमतौर पर सोरायसिस में दिखाई देने वाली सूजन और मोटी, चांदी जैसी सफेद पपड़ी से ढके दर्दनाक लाल, खुजलीदार और पपड़ीदार धब्बों के उभरे हुए हिस्से दिखाई देते हैं। आपको बता दें कि यह रोग दुनिया की लगभग 2 से 3% आबादी को प्रभावित करता है। पर मधुमेह और कैंसर के विपरीत, ज्यादातर लोगों में इस रोग के बारे में ज़्यादा जागरूकता नहीं है। जानकारी न होने के कारण अक्सर लोग इस तरह की त्वचा देखकर समझने लग जाते हैं, यह एक फैलने वाली बीमारी है और कई लोग इस समस्या की वजह से मरीज से दूर भागने लग जाते हैं। बता दें कि इस तरह के कई मिथक हैं, जिनको लोग सच्चाई मान ने लगे हैं। इसलिए इस तरह के मिथकों की सच्चाई को बताना बहुत जरूरी है, क्योंकि लोगों के पास इसकी सही जानकारी न होने के कारण सोरायसिस रोगियों के साथ लोग छुआछूत जैसा व्यवहार करने लग जाते हैं। ऐसे में तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से सोरायसिस से जुड़े ऐसे 7 मिथकों की सच्चाई के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे।  

सोरायसिस से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

मिथक 1. सोरायिसस सिर्फ एक त्वचा की बीमारी है।

सच्चाई : नहीं, डॉक्टर के अनुसार सोरायसिस सिर्फ एक कॉस्मेटिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें आमतौर पर व्यक्ति का पूरा शरीर प्रभावित होता है। बता दे की इस समस्या में व्यक्ति को जोड़ों का दर्द और थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती है। आमतौर पर एक सामान्य त्वचा कोशिका को परिपक्व होने और झड़ने में लगभग 30 दिन तक का समय लगता है। पर सोरायसिस मरीज के त्वचा की कोशिकाएं लगभग 3 से 4 दिन में पक जाती है। आमतौर पर यह जमा होकर पपड़ी नुमा बन जाती है और इसके साथ ही त्वचा पर खुजली होने लग जाती है, जो सोरायसिस का एक स्पष्ट लक्षण होता है। पर आप सोरायसिस को केवल त्वचा की बीमारी ही नहीं बोल सकते हैं। आमतौर पर इसका प्रभाव पुरे शरीर पर पड़ता है। 

मिथक 2. सोरायसिस एक फैलने वाली बीमारी है।

सच्चाई : बता दें की डॉक्टर का इस बात पर जोर देते हुए कहना है, कि मरीज की त्वचा पर लाल चकत्ते बनने की वजह से लोग आमतौर पर इस को फैलने वाली बीमारी समझ लेते हैं, पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि अगर सोरायसिस के मरीज को छूह लिया जाये या फिर उसके संपर्क में आ जाए, तो इसकी वजह से किसी स्वस्थ व्यक्ति को सोरायसिस की बीमारी बिलकुल भी नहीं होती है। आमतौर पर अगर आप किसी सोरायसिस इंसान के गले लगते हैं, या फिर उस के किस करते हैं या फिर आपस में खाना शेयर करते हैं, तो भी आपको इस से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हो सकती है। इसलिए हमको सोरायसिस समस्या से पीड़ित मरीज के साथ बिलकुल भी भेदभाव नहीं करना चाहिए।

मिथक 3. सोरायसिस की समस्या गर्मियों में ज्यादा बढ़ जाती है।

सच्चाई : डॉक्टर के अनुसार सोरायसिस की समस्या वैसे तो सर्दियों में गंभीर हो सकती है। दरअसल सर्दियों के महीने में त्वचा की नमी कम हो जाती है और इस महीने में व्यक्ति की सूखी और पपड़ी नुमा त्वचा की वजह से सोरायसिस की समस्या और बढ़ जाती है। आपको बता दें की इस मौसम में नमी कम होती है और ठंडी हवाओं और सूरज की कम रोशनी की वजह से सोरायसिस की समस्या के लक्षण बढ़ जाते हैं। हालाँकि इसके कुछ मामलों में गर्मियों के मौसम में बहुत ज्यादा गर्मी और व्यक्ति को पसीना आने की वजह से रोगी में सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं। आमतौर पर यह सोरायसिस के रोगी की स्थिति पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है।

मिथक 4. सोरायसिस और एक्जिमा एक ही बीमारी है।

सच्चाई : बता दें कि विशेषज्ञों के अनुसार, एक्जिमा और सोरायसिस हालांकि दोनों ही त्वचा से संबंधित बीमारियां हैं और दोनों में ही त्वचा में सूजन आ जाती है, पर आपको बता दें कि सोरायसिस ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें आमतौर पर त्वचा पर लाल पपड़ी नुमा जैसे मोटे धब्बे बन जाते हैं। और इसके साथ ही एक्जिमा एक एलर्जी से जुड़ी समस्या है, जिसमें एक व्यक्ति की त्वचा पर लाल सूखी खुजली जैसे धब्बे बन जाते हैं। हालांकि सोरायसिस की समस्या में भी खुजली होती है, पर आपको जानकारी दे दें कि एक्जिमा में खुजली बहुत ज्यादा होती है और इसके साथ ही इसमें रात के समय में खुजली की स्थिति काफी ज्यादा बदतर हो जाती है। दरअसल सोरायसिस और एक्जिमा एक ही तरह की बीमारी नहीं है, आमतौर पर दोनों ही स्थितियां बहुत अलग-अलग हैं। इसलिए इन दोनों के इलाज का तरीका भी काफी अलग होता है।

मिथक 5. सोरायसिस एक जेनेटिक बीमारी है।

सच्चाई : डॉक्टर के अनुसार अगर माता-पिता या फिर परिवार में किसी सदस्य को सोरायसिस की बीमारी होती है, तो यह बच्चों को भी हो सकती है। हालांकि आपको बता दें कि बहुत सारे मामलों में यह देखा गया है, कि परिवार के इतिहास में किसी को भी इस तरह की समस्या न होने के बावजूद बच्चों में सोरायिसस की समस्या देखी गयी है। आपको बता दें कि अगर माता-पिता दोनों को ही यह समस्या होती है, तो लगभग 50 फीसदी तक यह बीमारी बच्चे को होने का रिस्क रहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दरअसल सोरायसिस जैसी समस्या होने की वजह ज्यादातर तनाव, इंफेक्शन और जीवनशैली से जुड़े कारक हो सकते हैं।

मिथक 6. सोरायिसस की समस्या को मैनेज नहीं किया जा सकता।

सच्चाई : इस मिथक पर डॉक्टर बताते हैं, कि सोरायसिस की समस्या के इलाज के लिए फिलहाल कोई ऐसा इलाज नहीं है, जिस के उपयोग से इस को पूरी तरीके से ठीक किया जा सके, पर यह भी सच नहीं है, की इस समस्या को मैनेज नहीं किया जा सकता। दरअसल इस समस्या को मैनेज किया जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टरों द्वारा सोरायसिस की समस्या को मैनेज करने के लिए व्यक्ति को क्रीम या फिर त्वचा पर लगाने वाली दवाइयां दी जाती। आपको बता दें कि इसके आलावा इस समस्या से पीड़ित मरीज को लाइट थेरेपी के उपोग से इसके लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है।

मिथक 7. सोरायिसस की समस्या से फर्टिलिटी प्रभावित होती है।

सच्चाई : आमतौर पर लोगों की फर्टिलिटी से जुड़े इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए डॉक्टर का कहना है, कि अभी तक किसी भी रिसर्च में ऐसा पाया या फिर किसी ने इस तरह का  दावा नहीं किया है, कि सोरायसिस की समस्या की वजह से लोगों की फर्टिलिटी पर कोई नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोरायसिस से पीड़ित मरीज भी माता-पिता बन रहे हैं। इसलिए जो कोई भी सोरायसिस की समस्या से पीड़ित है, उनको ख़ास तौर पर अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और इस समस्या के लक्षणों को मैनेज करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल। 

प्रश्न 1. क्या तनाव से सोरायसिस हो सकता है?

हां, तनाव की वजह से व्यक्ति में सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए जो भी व्यक्ति इस समस्या से पीड़त होते हैं, खासतौर पर उसके लिए अपने तनाव को मैनेज करना बहुत जरूरी होता है।

 

प्रश्न 2. क्या बहुत सारा पानी पीना सोरायसिस के लिए अच्छा है?

आपको बता दें कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट होती है, जिसकी वजह से सोरायसिस वाली त्वचा में नमी बनी रहती है। हाँ बहुत सारा पानी पीना सोरायसिस के लिए बेहतर हो सकता है। 

 

प्रश्न 3. सोरायसिस का टेस्ट कैसे होता है?

बता दें कि सोरायसिस की समस्या की पहचान आमतौर पर त्वचा विशेषज्ञ करते हैं। दरअसल वह व्यक्ति की त्वचा की जांच और लक्षणों की पहचान करके सोरायसिस की जानकारी देते हैं।

निष्कर्ष : त्वचा हमारे शरीर का सबसे नाजुक अंग है। जो प्रदूषित हवा और खराब वातावरण या खराब जीवनशैली के कारण एलर्जी या सोरायसिस जैसी समस्याओं से प्रभावित होती है। सोरायसिस एक दीर्घकालिक त्वचा रोग है, जिससे त्वचा में गंभीर खुजली और लालिमा आ जाती है। और यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें लोगों के पैरों, कोहनी, उंगलियों, सिर, घुटनों, चेहरे, हथेलियों, पीठ के निचले हिस्से और पैरों के तलवों पर सोरायसिस के धब्बे पड़ जाते हैं। ज्यादातर लोगों में इस बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी होने के कारण, इस तरह की त्वचा को देखकर लोग समझने लगते हैं, कि यह एक फैलने वाली बीमारी है और कई लोग इसके चलते मरीज से दूर भागने लगते हैं। इसके साथ ही, सोरायसिस सिर्फ़ एक त्वचा रोग है और सोरायसिस और एक्ज़िमा एक ही बीमारी है, ऐसे सवालों को लेकर लोगों में कई मिथक फैले हुए हैं। त्वचा भी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, इसलिए त्वचा से जुड़ी किसी भी बात पर भरोसा करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। सोरायसिस जैसी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। यदि आप भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और आपको भी सोरायसिस जैसी समस्या है और आप इसका समाधान ढूंढ रहे हैं, तो आप आज ही डॉ. वात्स्यायन संजीवनी आयुर्वेदशाला में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।